
“नियम ताक पर, प्रमोशन जारी!” हाईकोर्ट सख्त—हेडमास्टर पदोन्नति पर लगाई रोक
रायपुर, 10 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में हेडमास्टर पदोन्नति प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए बस्तर संभाग में जारी पदोन्नति आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथमदृष्टया पाया कि यह आदेश निरस्त किए जा चुके पुराने नियमों के आधार पर जारी किया गया, जबकि राज्य में नई पदोन्नति नियमावली पहले ही लागू हो चुकी है।

यह मामला WPS 3078/2026 — दुर्गेश कश्यप एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन के रूप में न्यायालय के समक्ष आया, जिस पर सुनवाई न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता देवाशीष तिवारी तथा राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने पक्ष रखा।
याचिका में आरोप लगाया गया कि 23 मार्च 2026 को जारी पदोन्नति आदेश वर्ष 2019 के उन नियमों के आधार पर जारी किया गया, जिन्हें पहले ही समाप्त किया जा चुका है। जबकि 13 फरवरी 2026 से नई पदोन्नति नियमावली लागू है। इसके बावजूद पुराने प्रावधानों के आधार पर पदोन्नति देना नियमों का उल्लंघन बताया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि नई नियमावली में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य योग्यता बनाया गया है, लेकिन जिन शिक्षकों को पदोन्नति दी गई, उनमें कई TET उत्तीर्ण नहीं हैं। इस आधार पर पूरी प्रक्रिया को अवैध करार देने की मांग की गई है।
इसके साथ ही याचिका में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के नियमों के उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया गया। सुप्रीम कोर्ट के 2025 के निर्णय Anjuman Ishaat-E-Taleem Trust बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा गया कि बिना TET योग्यता के पदोन्नति देना न्यायसंगत नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए पदोन्नति आदेश के संचालन और क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि नियमों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न हैं, जिन पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।
फिलहाल इस आदेश के बाद बस्तर संभाग में हेडमास्टर पदोन्नति प्रक्रिया ठप हो गई है और अब सभी की नजर आगामी सुनवाई पर टिकी है।
शिक्षक संघ की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के इस आदेश पर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संघ के प्रांताध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने कहा कि NCTE नियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता थोपना अनुचित है। उन्होंने इसे पुराने शिक्षकों के साथ अन्याय बताया।
उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में शीघ्र समीक्षा याचिका (Review Petition) दायर करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार पहल नहीं करती है, तो संघ स्वयं सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।















